आओ बहन चुगली करें

आओ बहन थोड़ी चुगली लगाते है…
पड़ोसियों के घर में लड़ाइयां करवाते हैं।

पड़ोसियों के बच्चो पर बातें बनाते है …
उनके अच्छे भले बच्चो को निक्कम्मा बनाते है !

अपना घर तो तोड़ते ही है पड़ोसियों के घर में भी आग लगाते हैं …
आओ बहन थोड़ी चुगली लगाते है…

दुसरो के घर की कहानियां सुनते हैं।
तुम अपनी सुनाना, मैं अपनी सुनाऊँगी…

छोटी छोटी बातों को बड़ाचड़ा कर बताऊंगी !
चलो पड़ोसी होने का फर्ज निभाते हैं, भाभी जी के कान भर आते हैं।

चाय के नाम पर उनके घर जाते हैं, थोड़ी हम तांक झाक कर आते हैं।
चलों अब थोड़ी चरित्र पर उंगलियां उठाते है…!

हाय शुक्ला जी की बेटी शाम को देर से घर आती हैं …
ना जाने कहां-कहां जाती हैं ?

सक्सेना जी का बेटा भी कुछ कम नहीं,
महंगी गाड़ियों में घूमता है और शोक भी बड़े वाहियात रखता है !

आओ बहन हम एक चक्कर चलाते हैं,
इनकी कुछ अफ़वाह उड़ाते हैं,
चरित्र पर एक दाग लगाते हैं !
उनके सीधे-साधे बच्चों को बदनाम कर आते हैं!

आओ बहन थोड़ी चुगली लगाते है…
दूसरों के घर में तांक झाक कर नए किस्से बनाते हैं!!!

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