सफ़र लॉकडाउन का।

वक्त कुछ यू बितता चला गया,
इक्कीस दिन से ना, जाने कब
लॉकडाउन हफ्ते- दरहफ्ते बढ़ता चला गया।
वक्त के साथ बदल गई, कुछ आदतें भी,
अब मास्क लगाना जीवन का हिस्सा बन गया।

उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है,हर किसान,
इस बार फसलों को ख़राब कोरॉना कर गया।
कहीं रेल की पटरियों पर दम तोड़ती जिंदगी हैं,
तो कहीं घेरे में इंसान को खड़ा कॉरोना कर गया।
वक्त कुछ यू बितता चला गया।

अब हैरानी नहीं होती,खाली सड़कों को देख।
जब हर लम्हा कुछ यू बितता चला गया ।
लगने लगी है,चार दिवारी भी, अच्छी,
जब अपनों के साथ पल यू बितता,चला गया।
हफ्ते- दरहफ्ते लॉकडाउन बढ़ता चला गया।



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