जीवन को जीने हेतु पर्यावरण है महत्वपूर्ण आवरण

परि-आवरण= पर्यावरण जीवन को जीने के लिए एक महत्त्वपूर्ण आवरण है।मनुष्य पशु पक्षी जीव जन्तु , नदियों तालाबों बावलियों जंगल वन वाटिका वर्षा धूप हवा पानी पहाड़‌
गगन‌ समीर अनल जल धरणी का जहां निवास है वहां जीवन है ।
विभिन्नताओं से सजा विश्व एक ऐसे आवरण में है जिसे पर्यावरण कहते हैं परन्तु मानव स्वंय को इसका हिस्सा न समझते हुये स्वामी समझने की भूल कर बैठा है जिसका खामियाजा पर्यावरण में अनियमितता और भयावह दुर्घटनाएं देखने को मिल रहीं हैं।
सूखा बाढ़ मृदा क्षरण आक्सीजन की कमी
वैश्विक प्रदूषण वायु, ध्वनी, जल प्रदूषण इत्यादि आने वाली पीढ़ी को जीने तो क्या सांस भी नहीं लेने देगी।
मनुष्य यह भूल जाता है कि पेड़ों से अमूल्य प्राणवायु प्राप्त होती फिर भी उसे काटने से बाज नहीं आ रहा।शायद यदि पेड़ों से वाई-फाई मिलने लगे तो वह हजारों पेड़ लगा दे।
जिस दिन से कोरोना महामारी ने आक्रमण किया है मनुष्य का स्वामित्व छिन गया और पूरा विश्व व भारत नदियां स्वच्छ हो गयी प्रदूषण का स्तर गिर गया। तो मनुष्य को समन्वय बनाकर प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं का सेवन करना चाहिए न कि दोहन।
कल के दिन एक निरिह पशु हथीनी की हत्या से इंसानियत से भरोसा उठ गया ।
जब प्रकृति पलटवार करती है तो मनुष्य त्राहि माम् चिल्लाता है उसका सीधा उदाहरण कोरोना महामारी है।

कोरोना-वायरस के चक्र को रोकने के लिए विश्व के अधिकतर देशों ने तालाबंदी करने का फैसला लिया है। तालाबंदी के अंतर्गत नागरिकों को घर पर ही रहने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही वाहन और कारखानों पर भी रोक लगाई गई है। इन नियमों के कारण विश्व के अनेक देशों में प्रदूषण स्तर की निरंतर कमी देखी जा रही है।

चीन में जनवरी से ही कार्बन उत्सर्जन में 25% कमी देखी गई है। अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में कार्बन मोनो-ऑक्साइड की मात्र 2019 की तुलना इस साल में आधी पाई गई है। भारत की राजधानी दिल्ली में तालाबंदी के बाद वायु प्रदूषण स्तर 49% कम पाया गया है। 
तो आइये वृक्ष लगाइये व वसुधैव कुटुंबकम् की भावना से मानव व प्रकृति के सभी घटकों का ख्याल रखते हुये प्रकृति का संरक्षण व संवर्धन कीजिए ।
जय प्रकृति जय भारत

विवेकानन्द मिश्र

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