रूस के कोरोना वैक्सीन दावे में फिर उठे सवाल…

कोरोना वायरस मरीजों के लिए बनाई गई रूस की वैक्सीन की दुनियाभर में भारी मांग हो रही है। रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने दावा किया है कि 20 देशों ने वैक्सीन ‘स्पूतनिक-वी’ के लिए प्री-ऑर्डर कर दिया है। लेकिन इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं. रूस का कहना है कि वैक्सीन को देश में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए नियामक मंजूरी मिल गई है और यह दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण कदम है. राष्ट्रपति पुतिन ने वैक्सीन को लेकर किसी विशेषज्ञ की तरह कई सवालों के जवाब दिए. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी को वैक्सीन लगाई गई है.

हालांकि, ऐसी कई बातें हैं जो रूस के दावे पर संदेह उत्पन्न करती हैं. इसके अलावा, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिका भी पूरी तरह यह स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं कि रूस ने इतनी जल्दी वैक्सीन विकसित कर ली है. रूस की एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल ट्रायल ऑर्गनाइजेशन (ACTO) ने फिलहाल आधिकारिक टीके के रूप में स्पूतनिक V का पंजीकरण नहीं करने को कहा है. उसका कहना है कि पंजीकरण से पहले बड़े पैमाने पर ट्रायल किये जाने चाहिए

रूसी वैक्सीन पर सवाल उठने के पीछे एक बड़ी वजह ये है कि इस वैक्सीन के बारे में उतनी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है जितनी ब्रिटेन या अमेरिका की वैक्सीन की जानकारी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है. यानी कब ट्रायल शुरू हुए और कितने वक्त तक किए गए? कितने लोगों को शामिल किया गया? वैक्सीन के क्या साइड इफेक्ट रहे? वैक्सीन लगाने के बाद कितने लोग कोरोना से संक्रमित हुए और बीमार होने से बच गए। किसी भी वैक्सीन के लिए तीसरे फेज का ट्रायल (फाइनल टेस्टिंग) काफी अहम होता है जब हजारों लगों पर लंबे वक्त तक वैक्सीन के प्रभाव की जांच की जाती है. लेकिन रूस की कोरोना वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल अभी पूरा नहीं हुआ है।  रूसी वैक्सीन के शुरुआती ट्रायल बंदर और फिर इंसानों पर हुए थे. रूस को इन ट्रायल में कथित तौर से सफलता मिली. लेकिन वैक्सीन तैयार करने वाली संस्था Gamaleya Institute ने बड़े पैमाने पर वैक्सीन का नियंत्रित ट्रायल नहीं किया है जिससे  वैक्सीन से सुरक्षा और खतरे की जांच हो सके।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया को यह चिंता है कि रूस राजनीति या प्रोपेगैंडा के मकसद से जल्दबादी में वैक्सीन के सफल होने का ऐलान कर रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी पिछले हफ्ते चेतावनी दे चुका है कि रूस को टेस्टिंग के परंपरागत तरीकों को छोड़कर वैक्सीन तैयार नहीं करना चाहिए। हालांकि, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि वैक्सीन स्थिर रूप से इम्यूनिटी डेवलप करती है और पर्याप्त रूप से प्रभावी भी है. पुतिन ने कहा- मैं दोहराता हूं, यह वैक्सीन तमाम जरूरी जांच से गुजर चुकी है। वहीं, WHO ने दुनियाभर की तमाम वैक्सीन की लिस्ट तैयार की है जिनके ट्रायल चल रहे हैं. लेकिन अभी तक इस लिस्ट में रूसी वैक्सीन नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि पिछले हफ्ते रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय को वैक्सीन के इंसानी ट्रायल और किसी संभावित साइड इफेक्ट और रिसर्च वगैरह को लेकर विस्तृत सवाल भेजे गए थे, लेकिन मंत्रालय ने जवाब नहीं दिया।इससे पहले अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की सरकार आरोप लगा चुकी हैं कि रूसी सरकार से जुड़े हैकर वैक्सीन रिसर्च की जानकारी चोरी करने की कोशिश कर रहे हैं. इसकी वजह से भी रूसी वैक्सीन पर दुनिया का शक बढ़ गया. हालांकि, रूस के अधिकारियों ने वैक्सीन रिसर्च की जानकारी हैक करने के आरोपों को खारिज कर दिया।

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