BJP का गांधी परिवार पर हमला, बोले -“राजीव गांधी फाउंडेशन ने चीन से चंदा लिया”

नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच तकरार और कांग्रेस पार्टी की तरफ से केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर रुख के बीच एक बड़ी खबर ये है कि भारत स्थित चीनी दूतावास राजीव गांधी फाउंडेशन को फंडिंग करता रहा है। यह आरोप बीजेपी की ओर से लगाया गया है।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह आरोप लगाया कि चीन ने राजीव गांधी फाउंडेशन के लिए फंडिंग की है। कानून मंत्री ने कहा कि राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन ने पैसे दिए , कांग्रेस ये बताए कि ये प्रेम कैसे बढ़ गया, इनके कार्यकाल में ही चीन ने हमारी जमीन पर कब्जा किया. एक कानून है जिसके तहत कोई भी पार्टी बिना सरकार की अनुमति के विदेश से पैसा नहीं ले सकती। कांग्रेस स्पष्ट करे कि इस डोनेशन के लिए क्या सरकार से मंजूरी ली गई थी?
इस संबंध में उन्होंने कई दस्तावेजों का भी हवाला दिया।

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उन्होंने कहा कि राजीव गांधी फाउंडेशन के लिए डोनर की सूची है 2005-06 की। इसमें चीन के एम्बेसी ने डोनेट किया ऐसा साफ लिखा है। ऐसा क्यों हुआ? क्या जरूरत पड़ी? इसमें कई उद्योगपतियों,पीएसयू का भी नाम है। क्या ये काफी नहीं था कि चीन एम्बेसी से भी रिश्वत लेनी पड़ी। उन्होंने दावा किया कि चीन से फाउंडेशन को 90 लाख की फंडिंग की गई।

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि क्या ये सब सोची समझी रणनीति के तहत हुआ, जिसके बाद कांग्रेस की सरकार में भारत और चीन के बीच व्यापारीय घाटा तैंतीस गुना बढ़ गया। कांग्रेस पार्टी जवाब दे कि आखिर चीन के प्रति इतना प्रेम क्यों उमड़ गया था कि पार्टी के साथ एमओयू साइन हो रहे थे? राजीव गांधी फाउंडेशन को चीनी दूतावास पैसा दे रही है। आप भारत और चीन के बीच फ्री ट्रेड की बात कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एक समय कांग्रेस के राज में चीन को अपने देश का इतना बड़ा भूभाग दे दिया। दस साल से शासन में कांग्रेस के लोग चीन के सामने घुटने टेके हुए थे। इसलिए जब कभी चीन को लेकर सवाल उठते थे उनके रक्षा मंत्री प्रभावी जवाब नहीं देते थे।

रविशंकर प्रसाद ने एक और सवाल खड़े करते हुए कहा कि एक कानून है फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेटरी एक्ट 1976। इसमें धारा चार, पांच, छह और तेईस में कहा गया है कि कोई भी उम्मीदवार विदेश से पैसा नहीं ले सकता। कोई भी राजनीतिक पार्टी विदेश से पैसा नहीं ले सकती। कोई भी राजनीतिक टाइप का संगठन, बिना सरकार के अनुमति के विदेशी फंड नहीं ले सकती। मेरा मानना है कि राजीव गांधी फाउंडेशन एक प्रकार से कांग्रेस का एक्सटेंशन था। क्या उन्होंने चीन से पैसा लेने से पहले केंद्र सरकार की अनुमति ली थी? क्या उन्होंने बताया था कि किन शर्तों पर डोनेशन लिया और आपने इसका क्या उपयोग किया? अगर आपने जानकारी नहीं दी तो क्यों नहीं दी और अगर दी तो क्या ये बताया कि हम चीन के साथ फ्री ट्रेड के बदले में ये पैसा ले रहे हैं?

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, राजीव गांधी फाउंडेशन की चेयरपर्सन हैं। जबकि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी इस बोर्ड के सदस्य हैं। राजीव गांधी फाउंडेशन की सलाना रिपोर्ट के मुताबिक साल 2005-06 में आरजीएफ को चीनी दूतावास की तरफ से डोनेशन मिला था। चीनी दूतावास को सामान्य दाताओं की सूची में रखा गया है।

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