फिर जगी रथयात्रा निकलने की उम्मीद

पुरी, ओड़ीसा : जगन्नाथ रथयात्रा को लेकर अभी भी उम्मीद की किरण बाकी है। एक मुस्लिम समाजसेवी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि रथयात्रा निकालने पर न्यायालय को फिर से सोचना चाहिए और उन्होंने कोर्ट को रथयात्रा निकलने के कुछ तरीके भी सुझाए गए। श्रीजगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा टूटने से बचाई जा सकती है। याचिका पर रविवार या सोमवार को सुनवाई हो सकती है। 

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए यह आदेश पारित किया था। इस मामले में टिप्पणी करते हुए चीफ जस्टिस एस ए बोबड़ नेे कहा था कि अगर कोरोना संकटकाल में हमने रथयात्रा निकालने की इजाजत दी तो भगवान जगन्नाथ हमें कभी माफ नहीं करेंगे। अब इस मामले में दायर पुनर्विचार याचिका में हुसैन की तरफ से कहा गया है कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकालकर एक परंपरा को टूटने से बचाया जा सकता है।

याचिका में सुझाया गया यह तरीका

हुसैन के वकील प्रणय कुमार मोहपात्रा ने बताया कि याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है 23 जून को पूरे शहर को पूरी तरह शटडाउन कर दिया जाए। किसी को भी घर से निकलने की अनुमति न दी जाए। जगन्नाथ मंदिर के अपने 1172 सेवक हैं और इन सभी की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई है। तीनों रथों को खींचने के लिए 750 लोगों की आवश्यकता है और ऐसे में इन रथों को खींचने के लिए मंदिर के सेवक ही काफी हैं। रथयात्रा के दौरान तीनों रथों को खींचकर गुंडीचा मंदिर तक ले जाया जाता है। याचिका में कहा गया है कि मंदिर के सेवकों की मदद से बाहरी लोगों के शामिल हुए बिना भी रथयात्रा को निकाला जा सकता है।

पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की भी राय है कि कोई मध्य मार्ग निकाला जाना चाहिए ताकि मंदिर की परंपरा न टूटे। उनका कहना है कि लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए रथयात्रा पर रोक लगाना स्वागत योग्य है मगर न्यायालय को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए। इस मामले में कोई बीच का रास्ता निकाला जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को मंदिर समिति की बैठक भी हुई मगर इसमें किसी प्रकार का फैसला नहीं हो सका।

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