बर्थडे स्पेशल: चे ग्वेरा से जुड़ी कुछ खास बातें

आपने कभी न कभी इस शख्स को जरूर देखा होगा। किसी की टीशर्ट पर, फ़ोन के कवर पर, लाइटर पर या फिर किसी दीवार पर चस्पा वॉलपेपर पर। किसी भी चीज़ पर आपने इस चेहरे को देखा ही होगा। लोग इन्हें चे ग्वेरा के नाम से जानते हैं। पूरा नाम है अर्नेस्तो चे ग्वेरा।

चे ने क्यूबा का ना होकर भी वहां हुई सशस्त्र क्रांति में अहम रोल निभाया था। फिदेल कास्त्रो ने सरकार बनाई तो दूसरे देशों से संबंध स्थापित करने का ज़िम्मा चे ग्वेरा को सौंपा गया। चे मंत्री रहते एक बार भारत भी आए। तत्कालीन नेहरू सरकार ने उन्हें विशेष आमंत्रण भेजा था। नेहरू सरकार के आमंत्रण पर 30 जून 1959 को वो भारत पहुंचे थे।

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1959 में चे ग्वेरा ने भारत यात्रा के बाद एक रिपोर्ट लिखी थी। जो उन्होंने अपने नेता फ़िदेल कास्त्रो को सौंपी थी। तब वो क्यूबा की सरकार में मंत्री थे। ‘काहिरा से हमने भारत के लिए सीधी उड़ान भरी। 39 करोड़ आबादी और 30 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल। हमारी इस यात्रा में सभी उच्‍च भारतीय राजनीतिज्ञों से मुलाक़ातें शामिल थीं। नेहरू ने न सिर्फ दादा की आत्‍मीयता के साथ हमारा स्‍वागत किया बल्कि क्यूबा की जनता के समर्पण और उसके संघर्ष में भी अपनी पूरी रुचि दिखाई। हमें नेहरू ने बेशकीमती मशविरे दिए और हमारे उद्देश्‍य की पूर्ति में बिना शर्त अपनी चिंता का प्रदर्शन भी किया।
भारत यात्रा से हमें कई लाभदायक बातें सीखने को मिलीं। सबसे महत्‍वपूर्ण बात हमने यह जानी कि एक देश का आर्थिक विकास उसके तकनीकी विकास पर निर्भर करता है और इसके लिए वैज्ञानिक शोध संस्‍थानों का निर्माण बहुत ज़रूरी है। मुख्‍य रूप से दवाइयों, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान और कृषि के क्षेत्र में।


जब हम भारत से लौट रहे थे तो स्‍कूली बच्‍चों ने हमें जिस नारे के साथ विदाई दी, उसका तर्जुमा कुछ इस तरह है- क्यूबा और भारत भाई-भाई। सचमुच, क्यूबा और भारत भाई-भाई हैं’।

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