जितनी जमीन नाप लो, उतनी तुम्हारी

ये भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय की दूसरी किस्त है। पहली किस्त में आपको बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के लिए चंदे का एक किस्सा सुनाया था। आज बात एशिया के ‘सबसे बड़े’ विश्वविद्यालय बीएचयू की जमीन की। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वर्तमान में दो परिसर हैं। मुख्य परिसर (1300 एकड़) वाराणसी में है। और दूसरा मिर्जापुर के बरकछा में (2700 एकड़) है।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लिए महामना ने हैदराबाद के निजाम और दूसरी जगहों से चंदे का जुगाड़ तो कर लिया था। लेकिन जितना जरूरी चंदा जुटाना था। उससे कही ज्यादा जमीन का जुगाड़ करना था। जमीन के लियर ही एक दिन महामना (मदन मोहन मालवीय) काशी नरेश महाराज प्रभुनारायण सिंह के पास पहुंचे। उस समय काशी नरेश गंगा में स्नान कर रहे थे। काशी नरेश गंगा से जैसे ही डुबकियां लगाकर बाहर आए वैसे ही महामना ने जमीन मांग ली। महामना को काशी नरेश माना नहीं कर सके। लेकिन काशी नरेश भी जमीन को ऐसे ही नहीं देने वाले थे। उन्होंने महामना के सामने जमीन देने के लिए एक शर्त रखी।

नरेश ने कहा- ‘ जमीन तो मैं तुमको दे दूंगा लेकिन उसके लिए शर्त है। तुम दिनभर में सूरज ढ़लने तक पैदल चलकर लंबाई-चौड़ाई में जितनी जमीन नाप दोगे। मैं उतनी ही जमीन तुमको दान में दे दूंगा’।

ये शर्त महामना को भी भा गयी। और शर्त के लिए पंडित जी राजी हो गए। और दिन भर में जितना हो सका, उतनी जमीन नाप ली और शर्त के मुताबिक काशी नरेश ने उतनी जमीन विश्वविद्यालय के लिए दान में दे दी।

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