भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय का मजेदार किस्सा

भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय का एक मज़ेदार किस्सा बताता हूं।

पंडित मालवीय ने 4 फरवरी 1916 को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की नींव रखी थी। लेकिन नींव तो रख दी थी। अब उसको बनाने के लिए चंदा जुटाने की जरूरत थी। पंडित मालवीय चंदे के लिए पूरे देश का दौरा कर रहे थे। चंदे की तलाश में वो हैदराबाद के निजाम से मिलने पहुंचे। लेकिन निजाम ने पंडित जी को मदद करने से इनकार कर दिया।

निजाम ने तो मना कर दिया। लेकिन पंडित मालवीय हार मानने वाले नहीं थे। वे जिद पर अड़े रहे। इस पर निजाम ने कहा कि मेरे पास चंदे में देने के लिए सिर्फ अपनी जूती है। पंडित मालवीय चंदे में निजाम की जूती लेने के लिए राजी हो गए। निजाम की जूती लेकर हैदराबाद के चारमीनार के पास उसकी नीलामी लगा दी। ये देख वहां लोगों की भीड़ इकट्ठा ही गई। इतेफाक से निजाम की मां चारमीनार के पास से बंद बग्‍घी में गुजर रही थीं। भीड़ देखकर जब उन्होंने पूछा तो पता चला कि कोई 4 लाख रुपए में निजाम की जूती नीलाम हुई हैं।

इसपर निजाम की मां को लगा कि यह सिर्फ बेटे की जूती नहीं बल्की बीच शहर में शाही परिवार की इज़्ज़त नीलाम हो रही है। ये वो दौर था जब खानदानी लोगों के लिए ये सब बातें बहुत मायने रखती थीं। लेकिन शायद निज़ाम इस बात को समझ नहीं पाए। निजाम की मां फौरन निजाम काे सूचना भिजवाई। जिसके बाद निजाम ने पंडित मालवीय को बुलवाया और शर्मिंदा होकर बहुत सारा चंदा दिया।

ऐसे थे भारत रत्न स्वर्गीय पंडित मदन मोहन मालवीय। उनके बारे में और भी कई किस्से मशहूर हैं यह सिर्फ एक क़िस्त हैं। अगली किस्त में हम आपको बताएंगे कि BHU के इतनी जमीन कैसे आई।

– सागर पुंडीर

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