चीन के बराबर सेना तैनात कर भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब

लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर लगातार भारत और चीन के बीच तनाव स्थिति बनी हुई है। वही तनाव का आलम इस कदर है कि लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन और भारत की सेना एक बार फिर से आमने-सामने आ गई है। वैसे तो चीन ने सीमा पर और सेना की तैनाती बढ़ा दी है, मगर अब भारत भी पीछे नहीं रहने वाला है। बता दें कि भारत ने भी चीन के सेना के बराबर अपनी सेना तैनात कर दी है जिससे भारत ने भी चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया है। वही भारत द्वारा उठाए गए कदम से यह स्पष्ट कर हो गया है कि अब वह चीन से जारी गतिरोध से एक कदम भी पीछने हटने वाला नहीं है।

पूर्वी लद्दाख के तनाव वाले इलाके में चीन के साथ गतिरोध से अब भारत मुंहतोड़ जवाब दिया है।
काराकोरम दर्रा और इस क्षेत्र में तैनात चीनी सैनिकों का मुकाबला करने के लिए भारत ने सैनिकों को तैनात कर दिया है। यह जानकारी इस मामले से परिचित लोगों ने नाम न जाहिर होने की शर्त पर दी। बता दें कि पिछले दिनों चीन ने यहां वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किया था और भारतीय सैनिकों से झड़प की थी। वही मिली जानकारी के मुताबिक भारत ने यह फैसला भारतीय क्षेत्र में किसी भी तरह की चीनी घुसपैठ और भारतीय इलाके में स्थिति परिवर्तन की कोशिशों को नाकाम करने के उद्देश्य से लिया है।

प्रधानमंत्री ने लिया जायजा…

बता दें कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक आयोजित हुई। इस दौरान पीएम ने पूर्वी लद्दाख में गाल्वन घाटी और पैंगोंग झील इलाके में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनावपूर्ण स्थिति के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति का आकलन करने हेतु राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और रक्षा विभाग के प्रमुख जनरल बिपिन रावत के साथ बैठक की। वही सीडीएस रावत ने लद्दाख में पीएम मोदी को सैन्य स्थिति से अवगत कराते हुए स्थिति को संभालने के सुझाव दिए।

वही नाम न जाहिर होने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि बैठक का लब्बोलुआब यह रहा कि हम एलएसी पर यथास्थिति में कोई बदलाव नहीं होने देंगे। हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा, ‘हमने अतीत में भी ऐसी स्थितियों का सामना किया है और हम आगे भी इस हालात का सामना ताकत और संयम के साथ करेंगे।’

साथ ही आपको बताते चलें कि भारतीय सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस इलाके में चीनी कार्रवाई का फोकस क्षेत्र पर हावी होना और साथ ही भारत को दरबूक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी सड़क को पूरा करने से रोकना है। क्योंकि सड़क का निर्माण पूरा हो जाने से भारत को एक बड़ा फायदा पहुंचेगा और सैन्य आवाजाही और सैन्य पहुंच आसान हो जाएगी। इस तनातनी का अहम हिस्सा दौलत बेग ओल्डी में एक पुल का निर्माण है, जिसे चीन रोकना चाहता है।

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