इंडियन ऑयल को 4 साल में पहली बार कैसे हुआ घाटा, जानिए तेल का पूरा गणित

कोरो ना काल के बीच भारतीय तेल कंपनी इंडियन ऑयल (IOC) को पिछले 4 सालों में पहली बार किसी तिमाही में घाटे का मुंह देखना पड़ा है। कंपनी द्वारा महंगे दामों पर कच्चा तेल खरीदने और उसके बाद देशभर में हुए लॉकडाउन के कारण तेल की मांग में आई गिरावट के कारण कंपनी को मार्च तिमाही में 5185 करोड़ रुपयों का भारी घाटा हुआ है।

The Gazette Today India - इंडियन ऑयल को 4 साल में पहली बार कैसे हुआ घाटा, जानिए तेल का पूरा गणित
गेटी इमेज

कंपनी ने तकरीबन 45 दिनों के कच्चे तेल का भंडारण किया लेकिन इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के कारण इंडियन ऑयल को इन्वेंटरी ( जमा कच्चे तेल) में नुकसान उठाना पड़ा है। कंपनी ने जब इस कच्चे तेल को प्रोसेसिंग के लिए भेजा तब तक तेल की कीमतों में गिरावट आ गई थी जिसके कारण कंपनी को घाटा हुआ।

इसके अलावा 25 मार्च को लागू हुए देश भर में लॉकडाउन के कारण तेल की कीमतें औंधे मुंह गिर गई जिससे कंपनी को वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही यानी मार्च में 5185 करोड़ों रुपयों का घाटे का सामना करना पड़ा वही पिछले वर्ष कंपनी को मार्च 6,099 करोड़ रुपए का फायदा हुआ था।

The Gazette Today India - इंडियन ऑयल को 4 साल में पहली बार कैसे हुआ घाटा, जानिए तेल का पूरा गणित
गेटी इमेज

क्या है इन्वेंटरी घाटा, यह रहा तेल का पूरा गणित

भारत अपनी आवश्यकता का 80 फ़ीसदी तेल दूसरे देशों से आयात करता है। इन तेलों को आयातित देश से रिफाइनरी तक पहुंचने में लगभग 1 महीने का समय लगता है। इस दौरान तेल की कीमतों में भारी अंतर आ जाता है। क्योंकि मांग कम होने के कारण देशभर में तेल की कीमतों में इस बार गिरावट देखी गई थी।

The Gazette Today India - इंडियन ऑयल को 4 साल में पहली बार कैसे हुआ घाटा, जानिए तेल का पूरा गणित
गेटी इमेज

अब मान लीजिए कि किसी कंपनी ने 45 डॉलर प्रति बैरल की दर से तेल खरीदा हो पर रिफाइनरी तक पहुंचते-पहुंचते तेल की कीमत घटकर 30 डॉलर प्रति बैरल हो गया तो उसे 15 डॉलर प्रति बैरल के घाटे का सामना करना पड़ेगा क्योंकि कंपनी को तेल का मार्केट रेट मौजूदा बाजार के आधार पर ही तय करना होगा।

इस वर्ष इंडियन आयल (IOC) की मार्च तिमाही में तेल की ग्रॉस रिफायनरी मार्जिन माइनस 9.64 डॉलर प्रति बैरल रही यानी कि उसे प्रति बैरल 9.64 डॉलर का नुकसान हुआ है। जबकि पिछले वर्ष उसे प्रति बैरल 4.09 डॉलर का फायदा हुआ था।

The Gazette Today India - इंडियन ऑयल को 4 साल में पहली बार कैसे हुआ घाटा, जानिए तेल का पूरा गणित
गेटी इमेज

लॉकडाउन खुलने के बाद धीरे-धीरे तेल की मांग में तेजी देखने को मिल रही है पर स्थिति सामान्य होने में अभी समय लगेगा। इंडियन ऑयल के चेयरमैन संजीव सिंह का कहना है कि मांग में तेजी से सुधार हो रहा है और इस वर्ष के अंत तक स्थिति सामान्य हो जाएगी। अभी फिलहाल कंपनी की रिफाइनरी क्षमता का 90 फ़ीसदी तक इस्तेमाल किया जा रहा जुलाई में इसी 100 फ़ीसदी करने का लक्ष्य है। बता दें कि देश की 50 लाख बैरल प्रतिदिन की रिफाइनरी क्षमता का एक-तिहाई योगदान इंडियन ऑयल का है।

Leave a Reply

%d bloggers like this: