जाने क्यों आने वाले दिनों में कोटक महिंद्रा बैंक के सीईओ को छोड़ना पड़ सकता है पद

कोटक महिंद्रा बैंक के सीईओ उदय कोटक को आने वाले दिनों में अपना पद छोड़ना पड़ सकता है. गौरतलब है कि रिजर्व बैंक एक नियम लागू करने की तैयारी में है. इस नियम में कुछ ऐसी शर्तें हैं, जिनके लागू होने के बाद उदय कोटक को पद छोड़ना पड़ सकता है.

जाने क्या है पूरा मामला

न्‍यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार रिजर्व बैंक ने ‘कॉमर्शियल बैंकों में प्रशासन’ शीर्षक से एक परिचर्चा पत्र जारी किया है. वही इस परिचर्चा पत्र में बैंकों के प्रवर्तक समूह से संबंध रखने वाले सीईओ और पूर्णकालिक निदेशकों की आयु सीमा 70 वर्ष रखने का प्रस्‍ताव है. इसके साथ ही अधिकतम कार्यकाल 10 वर्ष तय करने का प्रस्ताव है.

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इसी के चलते उदय कोटक निजी बैंकिंग क्षेत्र के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले सीईओ में से हैं. वह साल 2003 से कोटक महिंद्रा बैंक का नेतृत्व कर रहे हैं. यानी उदय कोटक का कुल कार्यकाल 17 साल का हो गया है. एक अन्य बैंकिंग दिग्गज एचडीएफसी बैंक के सीईओ आदित्य पुरी भी इस कैटेगरी में आते हैं, लेकिन वह इस साल के अंत में रिटायर होने वाले हैं.

जाने क्या कहना है आरबीआई

इस दौरान आरबीआई के परिचर्चा पत्र में कहा गया है कि प्रवर्तक समूह से संबंध रखने वाले सीईओ और पूर्णकालिक निदेशकों को 10 साल के कार्यकाल के बाद मैनेजमेंट का नेतृत्व पेशेवरों को सौंप देना चाहिए. परिचर्चा पत्र के अनुसार किसी बैंक के प्रवर्तक/ प्रमुख शेयरधारक के लिए डब्ल्यूटीडी या बैंक के सीईओ के रूप में कामकाज को स्थिर करने और प्रबंधकीय नेतृत्व को एक पेशेवर प्रबंधन में बदलने के लिए 10 साल का समय पर्याप्त है. इससे न सिर्फ स्वामित्व से प्रबंधन को अलग करने में मदद मिलेगी, बल्कि पेशेवर प्रबंधन की संस्कृति को बढ़ावा भी मिलेगा.

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