नेपाल की संसद ने लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपना बताने वाले नक्शे को किया पास

शनिवार को नेपाल की संसद ने लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपना बताने वाले नक्शे को पास करने पर वोटिंग करने के साथ ही बिल पास कर दिया है. इससे पहले शुक्रवार को भारत-नेपाल सीमा सीतामढ़ी में फायरिंग हुई थी जिसमें एक की मौत और दो घायल हुए थे.

नेपाल की राजधानी काठमांडू में विवादित नक़्शे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

वही शनिवार सुबह से ही काठमांडू की सड़कों पर नक्शे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी हैं. इससे पहले शुक्रवार को भी कई प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर गए थे. जिसके बाद नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने शुक्रवार रात मीडिया के माध्यम से कहा था कि शनिवार यानी आज देश की संसद द्वारा एक ऐतिहासिक बिल पर फैसला लिया जाएगा और प्रदर्शनकारियों से अपील की थी कि वो किसी भी प्रकार के सरकार विरोधी प्रदर्शन में हिस्सा न लें. इससे गलत संदेश जाएगा. हम अपनी जमीन को वापस नक्शे में शामिल कर एक मिसाल कायम करने जा रहे हैं. सभी राजनीतिक दलों ने भी इसका समर्थन किया था. इसलिए लोग सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार का साथ देते हुए नक्शा पास होने की खुशी में प्रदर्शन करे.

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नेपाल की राजधानी काठमांडू में विवादित नक़्शे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

नेपाल के नक़्शे को बदलने के पीछे क्या है प्रेरण स्त्रोत

साथ ही नेपाल के नक़्शे को बदलने के पीछे विचार का प्रेरण स्त्रोत भारत द्वारा 2 नवंबर 2019 को जम्मू-कश्मीर को पुनर्व्यस्थित करते हुए नक्शे में बदलाव  को बातया था. “हमने सीमा विवाद को लेकर नई दिल्ली से कई बार बात करने की कोशिश की, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया. जिसके बाद सभी दलों ने मिलकर नक्शे में बदलाव करने पर जोर दिया. अब इसमें बदलाव नहीं हो सकता”. इससे पहले बुधवार को नेपाल की निचली संसद प्रतिनिधि सभा ने देश के नए और विवादित नक्शे को लेकर पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था.

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नेपाल का नया नक़्शा

बता दें कि 8 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड के लिपुलेख से कैलाश-मानसरोवर  के लिए सड़क का उद्घाटन किया था. जिस पर नेपाल ने कड़ी आपत्ति जताई थी. इसके बाद नेपाल ने नया नक्शा जारी करने का फैसला किया था और इसमें भारत के क्षेत्रों को भी अपना बताकर दिखाया है.

जैसा की आप सभी को पता ही है कि नेपाल चीनी प्रभाव में है,तो अब सवाल यह उठता है कि क्या सही में  नेपाली नक्शे में बदलाव भारत से प्रेरित है या चीन की भी इसमें दख़ल है!?

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