जानिए कैसे, केजरीवाल सरकार के एक फैसले ने बिखेर दिया हंसता – खेलता परिवार

दिल्ली में 42 वर्षीय एक आदमी को कोरोना होने के बावजूद किसी भी अस्पताल में इलाज ना मिल पाने के कारण उसे अपने गृह राज्य मध्यप्रदेश के भोपाल जाना पड़ा, जहां पहुंचने के दूसरे दिन ही उस व्यक्ति की मौत हो गई।

बता देती दिल्ली से कार्ड में फैसला लिया था, कि दिल्ली की किसी भी अस्पताल में बाहरी राज्यों के लोगों का इलाज नहीं किया जाएगा। 40 वर्षीय आदमी दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था। पिछले 8 दिनों से आदमी के अंदर कोरोना के सभी लक्षण थे जिसके लिए वो दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में गया जहां पर मरीज का को रोना टेस्ट कर लें और इलाज करने से मना कर दिया गया। दिल्ली में इलाज ना मिल पाने के कारण दिल्ली से भोपाल तक का 800 किलोमीटर का सफर ट्रेन से तय कर के व्यक्ति मध्य प्रदेश के भोपाल गया जहां उसका 19 वर्षीय बेटा अभी मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। भोपाल पहुंचने के दूसरे दिन पर इतने हमीदिया हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया।

व्यक्ति की पत्नी अस्थमा की मरीज है। मौत की खबर सुनकर उन्हें अटैक आया और उनकी हालत गंभीर है जिसके बाद महिला को दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल में ले जाया गया जहां महिला का इलाज करने से मना कर दिया गया। उसके बाद महिला को नोएडा में भर्ती कराया गया है। मृत व्यक्ति की 15 वर्षीय लड़की को होम क्वॉरेंटाइन में भेज दिया गया है। 19 वर्षीय लड़के को भोपाल के चिरायु अस्पताल में क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखा गया है।

वहीं दूसरी ओर इस मामले पर अब राजनीति छींटाकशी शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री लगता मिश्रा ने व्यक्ति की मौत का जिम्मेदार दिल्ली सरकार को ठहराया है। मैं दूसरी और अब भारतीय रेलवे सवालों के घेरे में खड़ी है जब उस व्यक्ति को कोरोना के लक्षण थे तो ऐसे में उसने ट्रेन में यात्रा कैसे की, रेलवे स्टेशन पर लोगों की स्क्रीनिंग में कोताही बरती जा रही है। जिसको लेकर रेलवे पर भी सवाल खड़े होते हैं।

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