सुप्रीम कोर्ट ने RBI से कहा – वित्त मंत्रालय के साथ करें बैठक और बताएं कि EMI पर ब्याज में छूट मिलेगी या नहीं?

कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते लोन की ईएमआई पर ब्याज लगाने के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से सवाल किया कि क्या ब्याज पर भी मोहलत दी जा सकती है ? कोर्ट ने वित्त मंत्रालय व रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों को संयुक्त बैठक करने का निर्देश दिया है साथ ही यह भी कहा है कि 3 दिन के अंदर इस बात का जवाब दें।

सुप्रीम कोर्ट ने यह बात स्पष्ट रूप से अवगत करा दिया है कि कोर्ट ब्याज माफ करने के लिए नहीं बल्कि उसे टालने की बात कह रही है। कोर्ट ने सॉलिसिटर तुषार मेहता से दोनों की बैठक का इंतजाम करने को कहा।इस मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होनी सुनिश्चित की गई है।

दरअसल कोरोना जैसी वैश्विक महामारी की वजह से आरबीआई ने 27 मार्च को सर्कुलर जारी किया था, जिसमें बैंकों को तीन महीने की अवधि के लिए किश्त भुगतान का समय दिया गया था, फिर 22 मई को इस अवधि को 31 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है। यानी कुल 6 महीने की अवधि हो गई।

जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा गया कि बैंक EMI पर समय देने के साथ- साथ ब्याज लगा रहे हैं जो कि गैर-कानूनी है. इसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने RBI और केंद्र से जवाब मांगा था.

आपको बता दें कि पहली सुनवाई में आरबीआई ने कहा था ने कहा कि लोगों को 6 महीने का ईएमआई अभी न देकर बाद में देने की छूट दी गई है, लेकिन इस अवधि का ब्याज भी नहीं लिया गया तो बैंकों को दो लाख करोड़ रुपए का नुकसान होगा. जवाब में ये भी कहा गया है कि अभी ब्याज नहीं लगाया गया तो बाद में ईएमआई पर ब्याज और बढ़ जाएगा और बैंकों व वित्तीय संस्थानों के लिए ब्याज ही आय का स्त्रोत है।

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